EK KHWAHISH (part1)
ट्रैन मुंबई के स्टेशन पर आ चुकी थी जैसे ही ट्रैन रुकी तो वह नीचे उतरी उसके हाथ सामान से भरे हुए थे एक हाथ में बड़ा सा बेग था और दूसरे में छोटा। उसने देखा चारो तरफ भीड़ ही भीड़ थी। बहुत शोर था यहाँ ,उसे अपने गांव का माहौल याद आया जहां शांति थी और चारो तरफ हरियाली। वह एक पेपर लिए हुए थी उस पर उस जगह का एड्रेस लिखा हुआ था जहाँ उस की मंज़िल थी वह ऑटो वाले के पास जाकर बोली -''भैया इस एड्रेस पर जाना है। ''मैडम 600 रुपए का भाड़ा लगेगा ''-ऑटो वाला एड्रेस देखकर बोला। किराया सुनकर उसकी बड़ी बड़ी आँखे हैरत से फैलकर और बड़ी हो गयी -''अरे भैया मुंबई में ही जाना है मुंबई से बाहर नहीं जो इतना किराया बता रहे हो। ''मैडम लगता है आप यहां पहली बार आई है इसलिए ऐसी बाते कर रही है चलना है तो चलो फ़ोकट में हमारा वक़्त न बर्बाद करो ''-ऑटो चालक बोला तो वह चुपचाप ऑटो में बैठ गयी लगभग आधे घंटे के बाद वह अपनी मंज़िल पर पहुंच गयी। वह ऑटो से नीचे उतर गयी उसने ऑटो वाले को पैसे देकर जैसे ही मुड़ी तो चौक गयी ''-अरे वाओ क्या बंगलो है मेने तो सपने में भी ऐसा बंगला नही देखा ...