GANG OF WONDERLAND (part3)
रमशा ने देखा की वह किसी गुफा के अंदर नहीं बल्कि वो जहाँ खड़ी थी वो एक अद्भुत जगह थी इतनी सुंदर कि ऐसी जगह आज़तक उसने अपनी लाइफ में पहले कभी भी नहीं देखी थी यहाँ तक कि टीवी में भी नहीं, हर जगह शांति थी इतनी शांति कि उसके पैरों की आहटे सुनाई दे रही थी वहाँ की जमीन ऐसी थी जैसे फूलो की मखमली चादर वहाँ बिछी हो | एक पल को रमशा को ऐसा लगा जैसे वह इस जगह को जानती हो वो भी बहुत अच्छे से |
वह आगे चलकर एक तरफ मुड़ गयी फिर अपने आप से बोली -''अरे वाह मुझे तो लग रहा था कि इस तरफ कोई महल है पर यहाँ तो सचमुच एक महल है कितना सुन्दर है यह महल ,बिलकुल जादुई कहानियों की तरह | क्या यह जगह वाक़ई जादुई है? खेर जो भी हो मुझे यहाँ घूमना चाहिए ऐसे मोके रोज नहीं मिलते जिनपे चौके लग जाये |
वह महल के अंदर चली गयी ,जैसे ही उसने महल के अंदर कदम रखा उस पर फूलो की बरसात होने लगी ,रमशा ख़ुशी से गाने लगी -''खुशियों की बरसात हुई , फूलो की बौछार हुई |
वह आगे बढ़ गयी वहाँ उसे एक कक्ष दिखाई दिया वह उस कक्ष के अंदर चली गयी उस कक्ष में एक फूलो का बेड था रमशा बेड पर बेठ गयी -''अरे वाह क्या बेड है ऐसा लग रहा है जैसे बादल पर बैठी हु कितना सॉफ्ट है ''| वह बेड पर कूदने लगी जब वह कूद-कूद कर थक गयी तो वह नीचे उतरी |
उसकी नज़र एक सीप पर पड़ी जो बेड के पास फूलो की मेज पर रखी थी उसने सीप उठा ली फिर उसने सीप को खोल कर देखा तो सीप के खुलते ही उसमे से एक चमकदार रौशनी निकली उस रौशनी की वजह से रमशा की आँखे बंद हो गयी | रौशनी कुछ पल बाद अपने आप बंद हो गयी रमशा ने देखा सीप के अंदर एक मोती रखा था जो रौशनी से झिलमिला रहा था |
रमशा को मोती बहुत अच्छा लगा जैसे ही उसने मोती को छुआ उसकी आँखों के सामंने धुंधली यादे लहराने लगी | रमशा ने मोती को छोड़ दिया और फिर अपने आप से बोली-''क्या हो रहा है मुझे कभी ऐसा लगता है कि में इस जगह को जानती हु और कभी डरावनी सी धुंधली यादे आँखों के सामने ऐसे आती है जैसे टीवी देख रही हु |
रमशा ने फिर से मोती को छुआ लेकिन इस बार कुछ नहीं हुआ रमशा ने मोती उठाकर गले में पहन लिया और कक्ष से बाहर आ गयी ,सामने उसे सीढ़िया दिखाई दी वह ऊपर चली गयी सामने दीवार पर उसने देखा एक बड़ी सी तस्वीर लगी थी हैरत तो उसे तब हुई जब उसने खुद को उस तस्वीर में पाया | और उस तस्वीर में वह अकेली नहीं थी दो लड़की और एक लड़का भी था वह नासमझी की हालत में वह सीढ़ियों से उतर रही थी की अचानक उसका पैर फिसला और जैसे ही वह गिरने को हुई किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे गिरने से बचाया |
उसने पीछे पलट कर देखा तो वह तस्वीर वाला लड़का वहाँ खड़ा था, वह रमशा को देखकर बोला -''अरे मिज़रा तुम ?

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