GANG OF WONDERLAND (part6)
''अरे रमशा बेटा आगई तुम, पिकनिक अच्छे से एन्जॉय की ना''-रमशा के घर आते ही मम्मी ने पूछा था।
''हाँ मम्मी खूब एन्जॉय किया सच में बहुत मज़ा आया और आपको पता है मेने एक ऐसी जगह देखी जो आज तक किसी ने नहीं देखी होगी ''- वह मम्मी से कुछ नहीं छुपाती थी।
''तुमने क्या वो तो सारे बच्चो ने देखी होगी ''-मम्मी आराम से बोली।
''नहीं मम्मी वो तो सिर्फ मे''............... अच्छा -अच्छा चलो फ्रेश हो जाओ में तुम्हारे लिए डिनर लगाती हूँ ''- मम्मी ने उसे बीच में ही टोका था।
''नहीं मम्मी मुझे भूक नहीं है में बहुत थक गयी हूँ इसलिए मुझे नींद आ रही है में सोने जा रही हूँ गुड नाईट ''-रमशा कहकर अपने कमरे चली गयी।
रमशा सो गयी तो उसे एक सपना दिखाई दिया जिसमे वह भाग रही थी उसके पीछे एक भयंकर दानव था ,वह डरकर भाग ही रही थी कि उसका पैर फिसला और नीचे गिर गयी वह दानव उसके बिलकुल करीब आ चुका था रमशा ने जैसे ही अपने आपको बचाने के लिए अपना हाथ आगे किया उसमे से कुछ जादुई तरंगे निकली और सामने खड़ा दानव जल कर भस्म हो गया।
हड़बड़ा कर रमशा की आँख खुल गयी ,वह अपने आप से बोली -''क्या मैं वाक़ई इतनी पावरफुल हूँ या सिर्फ यह एक सपना है। ''उसने अपना हाथ देखा तो चौंक गयी उसका हाथ जला हुआ था जैसे रियल में ही उसके हाथ से जादुई तरंगे निकली हो। तभी उसे मोती की याद आई जो वह वंडरलैंड से बिना किसी से पूछे अपने साथ ले आई थी ,उसने मोती को हाथ में लिया और जैसे ही उसके हाथो ने मोती को स्पर्श किया फिर से धुंधली यादे लहराने लगी उसने मोती को छोड़ दिया -''क्या होता है मै जब भी इस मोती को टच करती हूँ।
उसने सोचा वह मोती को वापस वंडरलैंड रख आएगी। वह फिर से सोने की कोशिश करने लगती है
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''यस्वी में परियों से मिलने जादुई नगरी जा रहा हूँ ,चुलबुल परी की शरारते ,प्रयोग परी की नई -नई खोज ,छूमंतर परी का अनोखा जादू ,सच में परियों के साथ इतना मज़ा आता है कि वक़्त का पता ही नहीं चलता मन तो करता है जब तक मिज़रा वापस आये वही रहने लगू -''प्रिंस यस्वी से बोला।

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