GANG OF WONDERLAND(part10)


''  होगी कोई इन्ही की साथी इसे भी इसकी बुरी किस्मत यहां खींच लायी है ''-विनाश परी मुस्कुराई। 

''मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि इस बुक को मैने पहले भी कहीं देखा है लेकिन कहाँ ?''रमशा बड़बड़ाई।

''ओ.के.में अब बुक को ओपन कर रहा हूँ ''-आहम बुक खोलते हुए बोला। 

''आहम रुको यह बुक मत खोलो ''-रमशा ने उसे टोका। 

''लेकिन क्यों रमशा बुक ही तो है इसमें इतना डरने की क्या जरुरत ,तुम खोलो आहम ''-हनी ने आहम से कहा। 

''विनाश परी यह लड़की तो पुस्तक खोलने से मना कर रही है कहीं आपकी योजना पर पानी न फेर दे ''-बड़बोले ने विनाश परी  को सावधान किया। 

''ऐसा कुछ नहीं होगा बड़बोले पुस्तक जरूर खुलेगी बस तुम देखते जाओ ''-विनाश परी ने आराम से कहा। 

''जाने मुझे यह गट फीलिंग्स क्यों आ रही है की यह किताब नहीं खुलनी चाहिए ''-रमशा अभी बड़बड़ा ही रही थी कि हनी ने किताब खोल दी ,किताब खुलने की देर थी वे चारो उसमे समा गए। 

''इशिका ,हनी,आहम ,नायाब ,तुम सब इस बुक में कैसे चले गए ,तुम सब सुन रहे हो ना मुझे ''-रमशा बुक के पास आकर चिल्लाई। 

''रमशा प्लीज हमे बाहर निकालो यहां बहुत अँधेरा है हमे डर लग रहा है ''-उन चारो की रुहाँसी आवाज़ सुनाई दी। 

''तुम सब फ़िक्र मत करो में तुम्हे बचाऊंगी ''-रमशा उन चारो से बोली। 

''यह क्या हो रहा है विनाश परी यह लड़की क्यों नहीं समाई इस पुस्तक के अंदर ''-बड़बोले आश्चर्यकित हुआ। 

''यही तो मेरी भी समझ नहीं आ रहा है बड़बोले कि यह लड़की इस पुस्तक के अंदर दाखिल  क्यों नहीं हुई ?

तभी उसी वक़्त रमशा पलटी थी अब उसका चेहरा उन दोनों की तरफ था। ''मिज़रा '' -उन दोनों की आँखे फटी की फटी रह गयी।  









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