GANG OF WONDERLAND(Part12)
''हां अभी करती हूँ ''-रमशा ने हाथ आगे किया।
''रमशा यह क्या तुम इतनी देर से हवा में बाते कर रही हो ''-इशिका जो उसे देख रही थी उससे बोली।
''हां में वो उपरवाले से दुआ कर रही थी कि हम सब को बचाले ''-उसने सफाई दी फिर सबसे नज़रे बचाकर उसने मोती की जाग्रित किया। मोती जाग्रित ही प्रिंस वहां आ गया जहां पुस्तक पड़ी थी।
''मेरा शक सही था यह वही पुस्तक है और जहां तक में जानता हूँ यह काम विनाश परी के अलावा कोई और नहीं कर सकता तुम्हे तो में बाद में देखूगा विनाश परी ,बहुत जल्द तुम्हारे विनाश के साथ आउगा यह वादा मेरा ''-प्रिंस ने पुस्तक पर हाथ रखा तो वह भी उसमे समा गया।
''विनाश परी यह तो प्रिंस था यह क्यों इस पुस्तक चला गया ''-बड़बोले बोला।
''बड़बोले इसे कहते है एक तीर तीन शिकार -मिज़रा,प्रिंस और मेरी बुराई की दुनिया की आज़ादी -हा -हा -हा -विनाश परी एक बार फिर हंसी थी।
''हेलो एवरीवन ''-प्रिंस की आवाज़ पर वे सब पीछे मुड़े।
'' पिंकू तुम यहां कैसे ''-हनी ने आगे बढ़कर सवाल पूछा था।
''अरे वो ...........वो एक पुस्तक मेरा मतलब एक बुक रास्ते में पड़ी थी जैसे ही उसे छुआ तो यहाँ आ गया ''-प्रिंस ने जल्दी से बात घुमाई -''लेकिन तुम सब यहां कैसे।
''हम भी उसी बुक की वजह से यहां है और तुम भी यहां फंस गए तुम्हे उस बुक को नहीं छूना चाहिए था पिंकू ''-इशिका ने प्रिंस से कहा।
''अब तो आ गया हूँ ,तो बाहर निकलने का रास्ता तो खोजना होगा चलो उस तरफ चलते है ''-प्रिंस एक तरफ इशारा करते हुए कहा और उनके साथ चलने लगा तो रमशा ने उसका हाथ पकड़कर उसे पीछे किया-''अब यह तुम्हारा कोनसा ड्रामा है तुम्हारा नाम तो प्रिंस है तो तुम पिंकू कैसे ''?
''यह तो तुम्हे ही पता होगा तुमने ही तो मिलवाया था मुझे इन सबसे पिंकू बनाकर,ओह में अब समझा तुम्हे इतनी हैरत क्यों हो रही है ,मेरी पर्सनालिटी पर यह नाम सूट नहीं करता ना पता नहीं तुमने यह नाम क्यों रखा मेरा पिंकू ''-प्रिंस ने अजीब सा मुँह बनाया।
''जस्ट शटअप, में क्यों मिलवाऊगी तुम्हे अपने दोस्तों से और bychance मिलवाया भी तो में झूट क्यों बोलूगी ,तुम्हे तुम्हारे नाम के साथ मिलवाऊगी ''-रमशा को उसके झूठ बोलने पर गुस्सा आया था।
''झूठ नहीं बोला तुमने सिर्फ नाम छुपाया और नाम के साथ पहचान ,जैसे प्रिंस का पिंकू वैसे ही मिज़रा का रमशा ''-प्रिंस ने उसे सच्चाई बताई।
''देखो अब तुम मुझे गुस्सा दिला रहे हो मैने पहले भी कहा था और अब भी बता रही हूँ में रमशा हूँ R.A.M.S.H.A मिज़रा नहीं समझे तुम ''-रमशा ने उसे ऊँगली उठाकर वार्न किया।
''यह तुम दोनों क्या फुसफुसा रहे हो ''-आहम ने पीछे पलटकर उनसे पूछा। ''कुछ नहीं ''-दोनों एकसाथ बोले थे।

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