GANG OF WONDERLAND(part9)

 ''रमशा अभी तक क्यों नहीं आई कहीं वो हमसे बदला तो नहीं ले रही कि हमने उसके साथ प्रैंक किया और अब वह हमारे साथ प्रैंक कर रही हो ''-हनी उन तीनो से बोला ,वे सब रमशा की बताई हुई जगह पर उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे। 

''बड़बोले देख रहे हो यह रहे मेरा शिकार यह बच्चे बनेगे इस द्वार की कुंजी ''-विनाश परी उन चारो को देखकर बोली। 

''कैसे विनाश परी उन सब को तुम इस पुस्तक के अंदर भेजोगी क्योकि मुझे नहीं लगता कि वे इतनी आसानी से बेवकूफ बनेगे ''-बड़बोले ने कहा। 

''तुम देखते जाओ बड़बोले यह बच्चे इस  पुस्तक के अंदर प्रवेश भी करेंगे और इस पुस्तक में छुपी बुराई को भी आज़ाद करेंगे ''-विनाश परी ने कहकर एक लड़की का रूप ले लिया। 

''मुझे नहीं लगता रमशा आएगी उसने हम सब को बेवकूफ बनाया है ,वंडरलैंड जैसी कोई जगह है ही नहीं ''-आहम से और इंतज़ार नहीं हो रहा था तो उन तीनो ने भी उसकी  हां में हां मिलायी। वे चारो जाने के लिए पलटे तो पीछे से किसी की पुकारने की आवाज़ पर उन्होंने पीछे देखा  तो एक लड़की वह खड़ी थी उन चारो के मुड़ते ही वह उनसे बोली-'प्लीज मेरी हेल्प करो में और मेरा भाई यहाँ घूमने आये थे ,मेरा भाई वहाँ गड्ढे में गिर गया उसको बाहर निकलने में मेरी मदद करो ''

''ओ के हम तुम्हारे भाई को निकालने में तुम्हारी मदद करेंगे चलो ''-इशिका ने उस लड़की से कहा और फिर वे चारो उस के पीछे चले गए ,आहम कहीं से रस्सी ले आया एक दूसरे की मदद से उन्होंने उस लड़के को बाहर निकाला। 

''में तुम सब का शुक्रिया कैसे अदा करू मेरी समझ नहीं आ रहा तुमने मेरे भाई की जान बचाई है ''-वह लड़की बोली।

''नहीं यह किसी बाते कर रही हो तुम ,तुम्हे हमारी हेल्प की जरुरत थी सो हमने कर दी इसमें थैंक्यू की क्या जरूरत ''-इशिका ने उसकी बात का जवाब दिया। 

''हां तुम यह बुक रख लो थैंक्यू गिफ्ट समझकर और हां तुम्हे यह बुक लेनी ही होगी तभी में समझुगी तुमने मेरा गिफ्ट एक्सेप्ट कर लिया और मेरी फ्रेंडशिप भी ''-उस लड़की ने इशिका को बुक देते हुए हाथ आगे किया जिसे उन चारो ने पकड़ लिया। 

''ओ.के अब हमे चलना होगा काफी टाइम हो गया ''-उस लड़की ने उनसे विदा ली और वहां से चले गए आगे जाकर विनाश परी और बड़बोले ने अपना रूप ले लिया -''देख लिया बड़बोले पुस्तक पंहुचा दी सच्चे और अच्छे बच्चो तक अब जैसे ही पुस्तक खुलेगी वैसे ही वह पुस्तक के अंदर ,चलो अब छुप जाओ उन पर नज़र रखते है ''-वे दोनों एक पेड़ के पीछे छुप गए। 

''कितनी अजीब सी किताब है ''-नायाब किताब देखते हुए बोली। 

''चलो खोल कर देखते है ऐसी कोनसी स्टोरी है इस बुक में ''-हनी बुक खोलने के लिए आगे बढ़े। 

''हेलो guys ,सॉरी देर हो गयी ''-रमशा वहाँ आई। 

''देर नहीं कुछ ज्यादा ही देर हो गयी है तुम्हे ''-आहम मुँह बनाते हुए बोला। 

''वो मेरे अंकल ऑन्टी आये थे तो इसीलिए देर हो गयी एनीवे वो सब छोड़ो यह बुक कहाँ से मिली ''-रमशा ने बुक को देखा। 

''यह हमे हमारी नई फ्रेंड ने दी है ''-हनी ने पूरी कहानी बताई। 

''खैर यह सब छोड़ो तुम्हारे अंकल आंटी से याद आया पिंकू कहाँ गया है इतने दिनों से स्कूल भी नहीं आया ''-इशिका ने रमशा से पूछा। 

''कौन पिंकू किस पिंकू की बात कर रही हो''-रमशा की आँखों में सवाल था। 

''अरे वही तुम्हारे अंकल आंटी का बेटा ''-इशिका ने आराम से कहा। 

''विनाश परी यह लड़की कौन है ''-रमशा की पीठ थी उनकी तरफ इसलिए उसका चेहरा नहीं दिखा। 








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